38 बेस्ट अकबर बीरबल stories in Hindi:- Akbar Birbal best Hindi stories with moral

38 best Akbar Birbal stories in Hindi with moral

हम लाये हे दुनिया की बेस्ट और प्रसीद अकबर बीरबल की कहानिया हिंदी में (Stories in Hindi )

38 best Akbar Birbal  Hindi stories with moral

 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #1

 बीरबल का परिचय 

“बीरबल (1528-1586) का असली नाम महेश था जो मुगल बादशाह अकबर के प्रशासन में मुगल दरबार का प्रमुख विज़ीर (वज़ीर-ए-आजम) था | बीरबल महान मुग़ल सम्राट अकबर के राजदरबार के नवरत्नों में प्रमुख थे- साधारणतया बीरबल का उल्लेख एक विदूषक के रूप में होता है – अकबर-बीरबल की आपसी नोक-झोंक व हास-परिहास के सैकड़ो किस्से व चुटकुले जनश्रुतियों में प्रचलित हैं, जिनके आधार पर बीरबल के विषय में एक आम धारणा यह है कि बीरबल एक विदूषक थे, जिनका एक मात्र काम अकबर का मनोविनोद करना और राजदरबार के गंभीर वातावरण को हल्का बनाना था| लकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है-तत्कालीन ऐतिहासिक ग्रंथों के अध्यन से बीरबल के बहुआयामी व्यक्तित्व के सम्बन्ध में ढेर सारे अकाट्य प्रमाण मिलते हैं और यह निष्कर्ष निकलता है कि बीरबल मात्र एक विदूषक ही नहीं बल्कि एक बहादुर योद्धा, प्रख्यात दानवीर, रीति-नीति व धर्म के प्रकांड विद्वान तथा तत्कालीन रीति परंपरा के कुशल कवि थे | 


– कवि भूषण ने अपने ग्रन्थ शिवराज भूषण में बीरबल को घाटमपुर तहसील के तिकवांपुर नामक गॉव का निवासी बताया है किन्तु स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार बीरबल दहिलर नामक गॉव के निवासी थे- चूँकि दहिलर और तिकवांपुर पास-पास ही स्थित हैं अतः इस विवाद में अधिक गुंजाइश नहीं है | शिव सिंह सरोज के अनुसार, बीरबल कान्यकुम्बज ब्राह्मण थे-बताया जाता है कि बीरबल का वास्तविक नाम ब्रह्मा था और इनके पिता का नाम गंगा दास था |

बीरबल कि उपाधि इन्हे सम्राट अकबर से मिली थी- कहा जाता है कि अकबर के दरबार में जाने से पहले काफी दिनों तक वे कालपी, कालिंजर तथा रीवां नरेश के दरबार में भी कवि के रूप में रह चुके थे |

अकबर कि लोकप्रियता कि खबर सुनकर ही ये उनके दरबार में गये थे- इनकी काव्यकुशलता और वाक्पटुता से अकबर इतना प्रभावित हुआ कि उसने राजा बीरबल कि उपाधि तथा कई गॉव की जागीर देकर इन्हे स्थायी रूप से अपने पास रख लिया |

सम्राट अकबर बीरबल की विद्व्ता और वाक्पटुता से इतना अधिक प्रभावित था कि उसने बीरबल को सेवक नहीं, एक अंतरंग मित्र का स्थान दे रखा था | कहा जाता है कि हिन्दू धर्म के प्रति अकबर कि उदारता और सहीसुणता बीरबर कि प्रेरणा कि वजह से ही थी |  सम्राट अकबर बीरबल से कितना अधिक प्रभावित था और  उनकी कितनी इज़्ज़त करता था, इसका उल्लेख अबुलफजल ने अकबरनामा में कई जगह किया है- बीरबल भी पूर्णरूपेण सम्राट अकबर के प्रति समर्पित थे- उन्हें अकबर कि न सिर्फ बौद्धिक पिपासा शांत कि बल्कि विभिन्न युद्धों में भाग लेकर अकबर के साम्राज्य विस्तार में भी उन्होंने सक्रिय योगदान दिया- बीरबल कि मृत्यु 1586 को पशिमोत्तर प्रान्त की लड़ाई में लड़ते हुए ही हुई थी|
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #2
दानवीर बीरबल


बीरबल अपनी दानवीरता और धर्मप्रियता के लिय भी काफी प्रसिद्ध थे-बीरबल की दानवीरता और धर्मप्रियता काफी प्रसिद्ध थी |

बीरबल कि धर्मप्रियता के प्रमाण उनके द्वारा बनाये गये मंदिर हैं- अपने सम्राट अकबर के नाम पर उन्होंने यमुना नदी के किनारे अकबरपुर नाम का एक गॉव बसाया जो अब बीरबल का अकबरपुर के नाम से प्रसिद्ध है और कानपूर देहात जिले के घाटमपुर तहसील में स्थित है- बीरबल ने यहाँ देवी-देवताओं के कई मंदिर बनवाए जिनके खंडर आज भी यत्र-तत्र बिखरे हुए हैं | अपने गॉव के पास कानपूर-हमीरपुर मुख्य मार्ग के किनारे सचेंडी नामक गॉव में इन्होने भगवान शंकर के एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया और उस मंदिर के सञ्चालन के लिय आस-पास के अस्सी गॉवों से वृत्ति बांध दी- यह मंदिर बेरबलेशवस महादेव का मंदिर कहलाया और आज वीरेवर महादेव के मंदिर के रूप म मशहूर है|

अपने जीवन के अंतिम समय में बीरबल ने भक्ति, नीति और ज्ञान विषयक कविताएं लिखीं | बीरबल कि पत्नी का देहवसान काफी पहले ही हो गया था- बीरबल के दो पुत्र और एक पुत्री थी- इनकी पुत्री का विवाह मशहूर कवि घाघ के भतीजे आशादत्त के साथ हुआ था- बताते हैं कि बीरबल कि पुत्री बीरबल से भी अधिक बुद्धिमान थी और विकट परिस्तिथियों में इनकी सहायता करती थी |

कुछ इतिहासकारों के अनुसार, बीरबल का वास्तविक नाम महेशदास था- जबकि कुछ इस नाम को स्वीकार नहीं करते |
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #3

बीरबल की नियुक्ति 


“एक बार बादशाह अकबर ने एक गाँव में अपना दरबार लगाया। उसी गाँव मे एक युवा ब्राह्मण किसान महेश दास भी रहता था। महेश ने बादशाह अकबर की घोषणा सुनी की उस कलाकार को बादशाह एक हज़ार स्वर्ण मुद्राए देंगे जो उनकी जीवंत तस्वीर बनाएगा।  

निश्चित दिन पर बादशाह के दरबार मे कलाकारों की भीड़ लग गयी। हर किसी के हाथ मे बादशाह की ढकी हुई तस्वीर थी। हर कोई दरबार मे यह जानने को उत्सुक था कि एक हज़ार स्वर्ण मोहरों का इनाम किसे मिलता है।

अकबर एक ऊंचे आसन पर बैठे और एक के बाद एक कलाकारों कि तस्वीर देखते और अपने विचारों के साथ सभी तसवीरों को एक-एक कर मना करते गये और बोले यह एक दम वैसी नहीं है जैसा मैं अब हूं।

जब महेश कि बारी आयी जो कि बाद में बीरबल के नाम से प्रसिद्ध हुए, तब तक अकबर परेशान हो चुके थे और बोले क्या तुम भी बाकी सब कि तरह ही मेरी तस्वीर बना कर लाये हो? लेकिन महेश बिना किसी भय के शांत स्वर में बोला “मेरे बादशाह, अपने आपको इसमे देखिए और स्वयं को संतुष्ट कीजिए।”

आश्चर्य कि बात यह थी कि यह बादशाह कि कोई तस्वीर नहीं थी बल्कि महेश के वस्त्रों से निकला एक दर्पण था।

यह देख कर सभी एक स्वर मे बोले “यही है बादशाह कि उत्तम तस्वीर।”
अकबर ने महेश दास का सम्मान किया और उसे एक हज़ार स्वर्ण मोहरें उपहार स्वरूप दीं। बादशाह ने महेश को एक राजकीय मोहर अंगूठी दी और फ़तेहपुर सीकरी, अपनी राजधानी, मे आने का निमंत्रण दिया। यही महेश दास आगे चलकर अकबर के विस्वास पात्र बीरबल बने |

Moral of the Hindi Story – अपने ग्राहक को वह दें जो वह चाहता है तथा जिससे उसकी आवशयकता पूर्ण होती है। अकबर किसी कलाकार द्वारा अपना चित्रण नहीं चाहते थे बल्कि वास्तविकता चाहते थे, जो कि एक दर्पण ही दिखा सकता था।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #4

आयु बढ़ाने वाला पेड़ 

“एक बार तुर्किस्तान के बादशाह को अकबर की बुद्धी की परीक्षा के लेने का विचार हुआ। उसने एक एलची को पत्र देकर सिपाहियों के साथ दिल्ली भेजा। पत्र का मजमून कुछ इस प्रकार था- ‘अकबरशाह! मुझे सुनने में आया है कि आपके भारततवर्ष में कोई ऐसा पेड़ पैदा होता है जिसके पत्ते खाने से मनुष्य की आयु बढ़ जाती है। यदि यह बात सच्ची है तो मेरे लिए उस पेड़ के थोड़े पत्ते अवश्य भिजवाएं.’

बादशाह उस पत्र को पढ़कर विचारमग्न हो गए। फिर कुछ देर तक बीरबल से राय मिलाकर उन्होंने सिपाहियों सहित उस एलची को कैद कर एक सुदृढ़ किले में बेद करवा दिया। इस प्रकार कैद हुए उनको कई दिन बीत गए तो बादशाह अकबर बीरबल को लेकर उन कैदियों को देखने गए।

बादशाह को देखकर उनको अपने मुक्त होने की आशा हुई, परन्तु यह बात निर्मूल थी। बादशाह उनके पास पहुंचकर बोले – ‘तुम्हारा बादशाह जिस वस्तु को चाहता है, वह मैं तब तक उसे नहीं दे सकूंगा जब तक कि इस सुदृढ़ किले की एक-दो ईट न ढह जाए, उसी वक्त तुम लोग आजाद किए जाओगे। खाने-पीने की तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी। मैंने उसका यथाचित प्रबन्ध करा दिया है।’ इतना कहकर बादशाह चले गए, परन्तु कैदियों की चिंता और बढ़ गई। वे अपने मुक्त होने के उपाय सोचने लगे। उनको अपने स्व्देश के सुखों का स्मरण कर बड़ा दुख होता था।

वे कुछ देर तक इसी चिंता में डूबे रहे। अंत में वे इश्वर की वन्दना करने लगे- ‘हे भबवान! क्या हम इस बन्धन से मुक्त नहीं किए जाएंगे? क्या हमारा जन्म इस किले में बन्द रहकर कष्ट भोगने के लिए हुआ है? आप तो दीनानाथ हैं, अपना नाम याद कर हम असहायों की भी सुध लीजिए।‘ इस प्रकार वे नित्य प्राथर्ना करने लगे।

ईश्वर की दयातलुता प्रसिद्ध है। एक दिन बड़े जोरों का भूकम्प आया और किले का कुछ भाग भूकम्प के कारण धराशायी हो गया। सामने का पर्वत भी टूटकर चकनाचूर हो गया। इस घटना के पश्चात एलची ने बादशाह के पास किला टूटने की सूचना भेजी।

बादशाह को अपनी कही हुई बात याद आ गई। इसलिए उस एलची को उसके साथियों सहित दरबार में बुलाकर बोले – ‘आपको अपने बादशाह का आशय बिदित होगा और अब उसका उत्तर भी तुमने समझ लिया है। यदि न समझा हो तो सुनो, मैं उसे और भी स्पष्ट किए देता हूं।’ देखो, तुम लोग गणना में केवल सौ हो और तुम्हारी आह से ऐसा सुदृढ़ किला ढह गया, फिर जहां हजारों मनुष्यों पर अत्याचार हो रहा हो, वहां के बादशाह की आयु कैसे बढ़ेगी? उसकी तो आयु घटती ही चली जाएगी और लोगों की आह से उसका शीघ्र ही पतन हो जाएगा। हमारे राज्य में अत्याचार नहीं होता, गरीब प्रजा पर अत्याचार न करना और भलीभांति पोष्ण करना ही आयुवर्धक वृक्ष है। बाकी सारी बातें मिथ्या हैं।‘

इस प्रकार समझा-बुझाकर बादशाह ने उस एलची को उसके साथियों सहित स्वदेश लौट जाने की आज्ञा दी और उनका राह-खर्च भी दिया। उन्होंने तुर्किस्तान में पहुंचकर यहां की सारी बातें अपने बादशाह को समझाईं। अकबर की शिक्षा लेकर बादशाह दरबारियों सहित उनकी भूरि-भुरि प्रशंसा करने लगा।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #5
सबसे बड़ी गरज़ 

” अकबर बादशाह विनोदी स्वभाव के थे। उन्हें पहेलियां बुझाने का बड़ा शौक था। उनके दरबार में एक से बढ़कर एक विद्वान और बुद्धिमान भी थे। लेकिन अकबर की अधितर पहेलियों का उत्तर बीरबल ही देते थे। यूं कहिए कि बीरबल ही अकबर की पहेलियों का उत्तर दे पाते थे, इसलिए अकबर बादशाह उनसे प्रसन्न रहते थे।

एक दिन की बात है कि बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। बीरबल की अनुपस्थिति में दूसरे सभासद बीरबल के वीषय में अकबर के कान भर रहे थे। उनकी तरह-तरह से बुराई कर रहे थे। अकबर बादशाह को यह सब अच्छा नहीं लगा। कारण था कि वे बीरबल को बहुत चाहते थे, उन्हें दिल से प्यार करते थे। अतः बादशाह ने अपने सभासदों से कहा- ‘तुम लोग ख्वामखाह बीरबल की बुराइयां कर रहे हो। वास्तव में बीरबल तुम लोगों से कहीं अधिक चतुर व बुद्धिमान हैं।‘

टकबर के ऐसा हने पर वे लोग कहने लगे – ‘‘बादशाह सलामत! टाप वास्तव में बीरबल को बहुत चाहते हैं, हम लोगों से ज्यादा प्यार करते हैं। इस तरह से आपने एक हिंदु को सिर चढ़ा रखा है।‘‘

डसी दिन जब सभा समाप्त होने का समय आया तो अकबर बादशाह ने अपने उन चार सभासदों से कहा – ‘देखो, आज बीरबल तो यहां नहीं, मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। तुम चारों मेरे प्रश्न का उत्तर दो और यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही उत्तर नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।‘

बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा उठे। उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा – ‘प्रश्न पूछिए बादशाह सलामत!‘

बादशाह ने पूछा – ‘संसार में सबसे बड़ी चीज़ क्या है?‘

अकबर का प्रश्न सुनकर चारों चुप। उनको समझ में सवाल का उत्तर नहीं आया। कुछ देर बाद उनमें से एक ने कहा – ‘खुदा की खुदाई सबसे बड़ी है।‘

दूसरे ने कहा – ‘बादशाह सलामत की सल्तनत बड़ी है।‘

उनके बेतुके उत्तर सुनकर बादशाह ने कहा – ‘अच्छी तरह सोच-समझकर उत्तर दो, वरना मैं कह चुका हूं कि तुम लोगों को फांसी लगवा दूंगा।‘

तीसरे ने डरते-डरते कहा – ‘बादशाह सलामत! ळमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।‘

बादशाह ने कहा- ‘इसमें मुझे कोई एतराज नहीं है, मैं तुम लोगों को एक सप्ताह का समय देता हूं।‘

वे चारों सभा से मुंह लटकाए बाहर निकले। उनके चेहरों पर मुर्दनगी छा गई। चारों ही फांसी के नाम से पीले पड़ गए। छः दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई उत्तर न सूझ सका।

तब उन चारों ने आपस में सलाह की कि इस प्रश्न का उत्तर केवल बीरबल ही बता सकता है। इस परेशानी से हमें वही उबार सकता है। यह निश्चय करके वे चारों बीरबल के पास पहुंचे गए। उन्होंने बीरबल को पूरी घटना कह सुनाई और हाथ जोड़कर उनसे विनती की कि वह उनके प्रश्न का उत्तर बता दें।

बीरबल ने उनका प्रश्न सुनकर मुस्करा कर कहा – ‘मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।‘

‘आप एक शर्त की बात करते हैं, हमें आपकी हजार शर्तें मंजूर हैं। बताइए क्या शर्त है?‘

तब बीरबल ने उनको अपनी शर्त बताते हुए कहा – ‘तुम चारों अपने कंधों पर मेरी चारपाई रखकर सभा महल तक ले चलोगे। इसके साथ ही तुम में से एक मेरा हुक्का पकड़ेगा, जिसे मैं पीता हुआ चलूंगा। एक मेरी जूतियां लेकर चलेगा।‘

अगर अन्य किसी समय पर बीरबल उनको यह सब करने के लिए कहते तो शायद वे ऐसा कभी न करते। लेकिन अब जब उन्हें फांसी लगने का डर था तो वे तुरन्त ही उनकी बात मानने को तैयार हो गए। उन्होंने वैसा ही किया। वे चारों अपने कंधों पर बीरबल की चारपाई उठाए, उनका हुक्का और जूतियां उठाए चल दिए।

बीरबल हुक्का पीते हुए चले जा रहे थे। रास्ते में लोग आश्चर्य से इस अजीब मंजर को देख रहे थे। उन्होंने जाकर बीरबल की चारपाई को सभा के मध्य रख दिया। बीरबल ने चारपाई से उतर कर कहा – ‘बादशाह सलामत! टापको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया। संसार में सबसे बड़ी चीज ‘गर्ज‘ है।‘

अकबर बादशाह मुस्करा उठे। दरअसल वे उन चारों को सबक सिखाना चाहते थे।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #6
एक पेड़ दो मालिक 


“अकबर बादशाह दरबार लगा कर बैठे थे। तभी राघव और केशव नाम के दो व्यक्ति अपने घर के पास स्थित आम के पेड़ का मामला ले कर आए। दोनों व्यक्तियों का कहना था कि वे ही आम के पेड़ के असल मालिक हैं और दुसरा व्यक्ति झूठ बोल रहा है। चूँकि आम का पेड़ फलों से लदा होता है, इसलिए दोनों में से कोई उसपर से अपना दावा नहीं हटाना चाहता।

मामले की सच्चाई जानने के लिए अकबर राघव और केशव के आसपास रहने वाले लोगो के बयान सुनते हैं। पर कोई फायदा नहीं हो पाता है। सभी लोग कहते हैं कि दोनों ही पेड़ को पानी देते थे। और दोनों ही पेड़ के आसपास कई बार देखे जाते थे। पेड़ की निगरानी करने वाले चौकीदार के बयान से भी साफ नहीं हुआ की पेड़ का असली मालिक राघव है कि केशव है, क्योंकि राघव और केशव दोनों ही पेड़ की रखवाली करने के लिए चौकीदार को पैसे देते थे।

अंत में अकबर थक हार कर अपने चतुर सलाहकार मंत्री बीरबल की सहायता लेते हैं। बीरबल तुरंत ही मामले की जड़ पकड़ लेते है। पर उन्हे सबूत के साथ मामला साबित करना होता है कि कौन सा पक्ष सही है और कौन सा झूठा। इस लिए वह एक नाटक रचते हैं।

बीरबल आम के पेड़ की चौकीदारी करने वाले चौकीदार को एक रात अपने पास रोक लेते हैं। उसके बाद बीरबल उसी रात को अपने दो भरोसेमंद व्यक्तियों को अलग अलग राघव और केशव के घर “झूठे समाचार” के साथ भेज देते हैं। और समाचार देने के बाद छुप कर घर में होने वाली बातचीत सुनने का निर्देश देते हैं।

केशव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है कि आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है। आप जा कर देख लीजिये। यह खबर देते वक्त केशव घर पर नहीं होता है, पर केशव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर केशव को सुनाती है।

केशव बोलता है,  “हां… हां… सुन लिया अब खाना लगा। वैसे भी बादशाह के दरबार में अभी फेसला होना बाकी है… पता नही हमे मिलेगा कि नहीं। और खाली पेट चोरों से लड़ने की ताकत कहाँ से आएगी; वैसे भी चोरों के पास तो आजकल हथियार भी होते हैं।”

आदेश अनुसार “झूठा समाचार” पहुंचाने वाला व्यक्ति केशव की यह बात सुनकर बीरबल को बता देता है।

 राघव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है, “आप के आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है। आप जा कर देख लीजियेगा।”

यह खबर देते वक्त राघव भी अपने घर पर नहीं होता है, पर राघव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर राघव को सुनाती है।

राघव आव देखता है न ताव, फ़ौरन लाठी उठता है और पेड़ की ओर भागता है। उसकी पत्नी आवाज लगाती है, अरे खाना तो खा लो फिर जाना… राघव जवाब देता है कि… खाना भागा नहीं जाएगा पर हमारे आम के पेड़ से आम चोरी हो गए तो वह वापस नहीं आएंगे… इतना बोल कर राघव दौड़ता हुआ पेड़ के पास चला जाता है।

आदेश अनुसार “झूठा समाचार” पहुंचाने वाला व्यक्ति बीरबल को सारी बात बता देते हैं।

दूसरे दिन अकबर के दरबार में राघव और केशव को बुलाया जाता है। और बीरबल रात को किए हुए परीक्षण का वृतांत बादशाह अकबर को सुना देते हैं जिसमे भेजे गए दोनों व्यक्ति गवाही देते हैं। अकबर राघव को आम के पेड़ का मालिक घोषित करते हैं। और केशव को पेड़ पर झूठा दावा करने के लिए कडा दंड देते हैं। तथा मामले को बुद्धि पूर्वक, चतुराई से सुल्झाने के लिए बीरबल की प्रशंशा करते हैं।

सच ही तो है,  जो वक्ती परिश्रम कर के अपनी किसी वस्तु या संपत्ति का जतन करता है उसे उसकी परवाह अधिक होती है।

Moral of  Hindi story: ठगी करने वाले व्यक्ति को अंत में दण्डित होना पड़ता है, इसलिए कभी किसी को धोखा ना दें.
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #7
तोते की मौत 


“एक बार बादशाह अकबर किसी व्यापारी के पास से तोता खरीद कर लाये। वह तोता देखने में अत्यंत सुंदर था और उसकी बोली भी बड़ी मीठी थी। अकबर ने उस तोते की रखवाली के लिए एक सेवक को नियुक्त कर दिया, और उसे साफ़ हिदायत दे दी कि –

अगर तोता मरा तो तुम्हें मृत्यु दंड दे दूंगा। और इसके अलावा जिसने भी अपने मुंह से कहा कि ‘तोता मर चुका है‘ उसे भी मौत की सज़ा मिलेगी । इसलिए तोते की रखवाली अच्छे से करना।

सेवक तोते को ले कर चला गया। और बड़े उत्साह से उसकी देखभाल करने लगा। उसे कहीं ना कहीं यह डर सता रहा था कि अगर कहीं बादशाह का तोता मरा तो उसकी जान पर बन आएगी। और फिर एक दिन ऐसा ही हुआ। तोता अचानक मर गया। अब सेवक के हाथ पाँव फूलने लगे। उसे बादशाह अकबर की कही बात याद थी। वह तुरंत दौड़ कर बीरबल के पास गया। और पूरी बात बताई।

बीरबल ने उस सेवक को पानी पिलाया और कहा, “चिंता मत करो। मै बादशाह से बात करूंगा.. तुम बस इस समय उस तोते से दूर हो जाओ। “

थोड़ी देर बाद बीरबल अकेले बादशाह के पास गए और बोले कि-

मालिक, आप का जो तोता था….वह…

इतना बोल कर बीरबल ने बात अधूरी छोड़ दी।

अकबर बादशाह तुरंत सिंहासन से खड़े हुए और बोले, क्या हुआ? तोता मर गया?

बीरबल बोले, “मै सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि आप का तोता ना मुंह खोलता है, ना खाता है, ना पीता है, ना हिलता है, ना डुलता है। ना चलता है, ना फुदकता है। उसकी आँखें बंद है। और वह अपने पिंजरे में लेटा पड़ा है। आप आइये और ज़रा उसे देखिये।”

अकबर और बीरबल फ़ौरन तोते के पास गए।

“अरे बीरबल ‘तोता मर चुका है।’ ये बात तुम मुझे वहीं पर नहीं बता सकते थे।”, अकबर क्रोधित होते हुए बोले।”उस तोते का रखवाला कहाँ है? मैं उसे अभी अपनी तलवार से सजाये मौत दूंगा।”

तब बीरबल बोले, “जी मैं अभी उस रखवाले को हाज़िर करता हूँ लेकिन ये तो बताइये कि आपको मृत्यु देने के लिए मैं किसे बुलाऊं।”

“क्या मतलब है तुम्हारा?”, अकबर जोर से चीखे।

“जी, आप ही ने तो कहा था कि जो कोई भी बोलेगा कि ‘तोता मर चुका है’, उसे भी मौत की सजा दी जायेगी, और अभी कुछ देर पहले आप ही के मुख से ये बात निकली थी।”

अब अकबर को अपनी गलती का एहसास हो गया।

बीरबल की इस चतुराई से अकबर हंस पड़े और वे दोनों हँसते-हँसते दरबार लौट गए। अकबर ने तुरंत घोषणा कर दी की सेवक पर कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। तोता अपनी मौत मरा है, उसमें किसी का कोई दोष नहीं है।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #8
आदमी एक खूबियाँ तीन 


“एक बार अकबर और बीरबल बागीचे में बैठे थे। अचानक अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या तुम किसी ऐसे इन्सान को खोज सकते हो जिसमें अलग-अलग बोली बोलने की खूबी हों?

बीरबल ने कहा, क्यों नहीं, मै एक आदमी जानता हूँ जो तोते की बोली बोलता है, शेर की बोली बोलता है, और गधे की बोली भी बोलता है। अकबर इस बात को सुन कर हैरत में पड़ गए। उन्होने बीरबल को कहा किअगले दिन उस आदमी को पेश किया जाये।

बीरबल उस आदमी को अगले दिन सुबह दरबार में ले गए। और उसे एक छोटी बोतल शराब पीला दी। अब हल्के नशे की हालत में शराबी अकबर बादशाह के आगे खड़ा था। वह जानता था की दारू पी कर आया जान कर बादशाह सज़ा देगा। इस लिए वह गिड़गिड़ाने लगा। और बादशाह की खुशामत करने लगा। तब बीरबल बोले की हुज़ूर, यह जो सज़ा के डर से बोल रहा है वह तोते की भाषा है।

उसके बाद बीरबल ने वहीं, उस आदमी को एक और शराब की बोतल पिला दी। अब वह आदमी पूरी तरह नशे में था। वह अकबर बादशाह के सामने सीना तान कर खड़ा हो गया। उसने कहा कि आप नगर के बादशाह हैं तो क्या हुआ। में भी अपने घर का बादशाह हूँ। मै यहाँ किसी से नहीं डरता हूँ।

बीरबल बोले कि  हुज़ूर, अब शराब के नशे में निडर होकर यह जो बोल रहा है यह शेर की भाषा है।

अब फिर से बीरबल ने उस आदमी का मुह पकड़ कर एक और बोतल उसके गले से उतार दी। इस बार वह आदमी लड़खड़ाते गिरते पड़ते हुए ज़मीन पर लेट गया और हाथ पाँव हवा में भांजते हुए, मुंह से उल-जूलूल आवाज़ें निकालने लगा। अब बीरबल बोले कि हुज़ूर अब यह जो बोल रहा है वह गधे की भाषा है।

अकबर एक बार फिर बीरबल की हाज़िर जवाबी से प्रसन्न हुए, और यह मनोरंजक उदाहरण पेश करने के लिए उन्होने बीरबल को इनाम दिया।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #9
तीन रुपये, तीन चीजे 


“एक मंत्री की उदास शक्ल देख बादशाह अकबर ने उसकी उदासी का कारण पूछा। तब मंत्री बोले कि आप सारे महत्वपूर्ण कार्य बीरबल को सौप कर उसे महत्ता देते हैं। जिस कारण हमें अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका ही नहीं मिलता है। इस बात को सुन कर अकबर ने उस मंत्री को तीन रूपये दिये और कहा कि आप बाज़ार जा कर इन तीन रुपयों को तीन चीजों पर बराबर-बराबर खर्च करें…यानी हर एक चीज पर 1 रुपये।

लेकिन शर्त यह है कि-

पहली  चीज यहाँ की होनी चाहिए। दूसरी चीज वहाँ की होनी चाहिए। और तीसरी चीज ना यहाँ की होनी चाहिए और ना वहाँ की होनी चाहिए।

दरबारी मंत्री अकबर से तीन रूपये ले कर बाज़ार निकल पड़ा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वो अब क्या करे। वह एक दुकान से दुसरे दुकान चक्कर लगाने लगा लेकिन उसे ऐसा कोई नहीं मिला जो इस शर्त के मुताबिक एक-एक रूपये वाली तीन चीज़ें दे सके। वह थक हार कर वापस अकबर के पास लौट आया।

अब बादशाह अकबर ने यही कार्य बीरबल को दिया।

बीरबल एक घंटे में अकबर बादशाह की चुनौती पार लगा कर तीन वस्तुएँ ले कर लौट आया। अब बीरबल ने उन वस्तुओं का वृतांत कुछ इस प्रकार सुनाया।

पहला एक रुपया मैंने मिठाई पर खर्च कर दिया जो यहाँ इस दुनिया की चीज है। दूसरा रुपया मैंने एक गरीब फ़कीर को दान किया जिससे मुझे पुण्य मिला जो वहाँ यानी ज़न्नत की चीज है। और तीसरे रुपये से मैंने जुवा खेला और हार गया… इस तरह “जुवे में हारा रुपया” वो तीसरी चीज थी जो ना यहाँ मेरे काम आई न वहां ,ज़न्नत में मुझे नसीब होगी।

बीरबल की चतुराईपूर्ण बात सुनकर राजा के साथ-साथ दरबारी भी मुस्कुरा पड़े और सभी ने उनकी बुद्धि का लोहा मान लिया।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #10
कुएं के पानी का न्याय


“एक बार अकबर के दरबार में एक किसान व उसका पड़ोसी शिकायत लेकर पहुंचे। किसान ने अपने पाड़ोसी कि तरफ इशारा करते हुए कहा, “जहांपनहा, मैंने इससे एक कुआं खरीदा था, और अब यह हमसे पानी कि कीमत भी मांग रहा है।”

“यह ठीक है, जहांपनहा”, पड़ोसी बोला। मैंने इसे कुआं बेचा था न कि पानी।” बादशाह ने बीरबल को झगड़ा सुलझाने को कहा।

बीरबल ने पड़ोसी से पूछा, “तुमने कहा कि तुमने किसान को कुआं बेचा था।” इसलिय कुआं तो किसान का है, लकिन तुमने अपना पानी उसके कुएँ मे रखा। क्या यह सही है? तो, इस मामले में तुम्हें पानी रखने का किराया देना होगा या फिर सारा पानी एक साथ निकालना पड़ेगा।”

पड़ोसी समझ गया कि उसकी चालाकी अब नहीं चलेगी। उसने जल्दी से माफी मांगी और चला गया।

Hindi story moral: यदि आप लोगो को उनके अधिकार की वस्तु नहीं देते तो हम पराजित हो सकते हैं।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #11
धर्म और बुद्धी का सम्बंध


“बीरबल एक ब्राह्मण थे और बहुत बुद्धिमान थे तो बादशाह अकबर ने भी ब्राह्मण बनने की सोची। बीरबल ने काफी समझाने की कोशिश की कि एक अच्छा आदमी होना काफी है लकिन अकबर  नहीं माने और एक संस्कार कार्य कि मांग की।

बीरबल बादशाह को यह कह कर एक नदी किनारे ले गये की वंहा पर एक व्यक्ति मुगल बादशाह को हिन्दू ब्राह्मण बना सकता है। वह व्यक्ति वहाँ पर एक गधे को रगड़ रहा था।

उस आदमी ने बताया, “मैं अपने गधे को घोड़े मे बदल रहा हूँ। एक साधु ने मुझे बताया कि यदि मैं नदी किनारे खड़े होकर अपने गधे को रगड़ूँगा तो वह घोडा बन जायेगा।”

अकबर उस पर ज़ोर से हंसे। यह कभी नहीं हो सकता, यह कैसे हो सकता है?” जब बीरबल हंसे, तो अकबर को उनकी चल समझ आ गयी।

Hindi Story Moral: आपकी बुद्धि का रंग, जाती, धर्म से कोई संबंध नहीं है।
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 Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #12
मुश्किल काम 

“एक दिन की बात है अकबर बादशाह को किसी मसले पर सलाह के लिए बीरबल की बहुत जरूरत थी बीरबल के नियत समय पर दरबार में न पहुँचने पर उन्हें बुलाने के लिए एक आदमी भेजा गया।

बीरबल ने कहा बादशाह से जाकर कहो के बीरबल लड़के को फुसला रहे हैं थोड़ी देर में आते हैं। जब थोड़े समय तक बीरबल न पहुंचा तो अकबर का आदमी बीरबल को लेने फिर आया। अब भी बीरबल ने फिर वहीँ जवाब दिया। तीसरी बार बुलाने गए तो अकबर बहुत नाराज हुआ। बादशाह ने कहा लड़का फुसलाने में इतनी देर लगती है क्या ?

बीरबल ने कहा “हजूर लड़का फुसलाना भी बहुत कठिन कार्य है।

कुछ नाहिंन होता लाओ कोई लड़का में उसे फुसलाकर दिखाता हूं। तभी बीरबल ने बोला हजूर अभी तो कोई मचला हुआ बच्चा नहीं मिलेगा थोड़ी देर के लिए में ही बच्चा मन जाता हूं। हजूर आप तो सब के माँ -बाप हैं आप मुझे फुसला दीजिए।

“चलो ठीक है” अकबर ने बोला

बीरबल उऊ उऊ करके ठुनकने लगा।

akbar ने बोला बच्चे तुम्हे क्या चाहिए ?

हाथी लूँगा।

अकबर के यहां भला हाथियों की क्या कमी थी एक बड़ा हाथी आ गया फिर भी बीरबल का ठुनकना बंद नहीं हुआ।

अब क्या चाहिए बादशाह ने पूछा

एक मटका लाओ बीरबल बोला

तुरंत एक मिट्टी का मटका लाया गया फिर भी ठुनकना बंद नहीं हुआ तभी बादशाह ने पूछा अब क्या चाहिए ?

इस हाथी को मटके में डाल दो

बादशाह ने हैरानी से पूछा बीरबल तुम कैसी बात करते हो भला मटके में कहीं हाथी kaise समा सकता है ?

बीरबल ने कहा हजूर आप यह क्यों भूल जाते हों के में इस वक्त छोटा बच्चा बना हूं छोटे बच्चे से समझदारी की उम्मीद रखना तो हिमाकत ही है कब क्या बात उसके दिमाग में आएगी उसका कोई ठिकाना नहीं रहता।

इसीलिए मैंने पहले ही महाराज से बोला था के लड़का फुसलाना बहुत मुश्किल कार्य है।

आखिर बादशाह को बीरबल की बात माननी पड़ी।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #13
 बैल का ग्यान 


“बादशाह अकबर हमेशा ही बीरबल के कामों की तरीफ़ करते रहते थे। एक बार बादशाह अकबर ने दरवार में मौजूद लोगों से बीरबल की गैर उपस्थिति में कहा के अगर किसी को भी बीरबल की योग्यता पर आशंका हो तो बोलो ? तभी उनके दरवार में आए एक आदमी ने कहा के हजूर अगर बीरबल इतने ही बुद्धिमान और कुशल हैं तो उनसे कहिए के वो बैल का दूध लेकर आएं । उस आदमी की बात को सुनकर बादशाह अकबर भी हैरानी में पड़ गया। परन्तु फिर भी अकबर ने इस संदेश को बीरबल के पास भेजा। सन्देश था के महाराज बादशाह अकबर के लिए कल तक बैल का दूध पहुँच जाना चाहिए।

बीरबल ने आज तक बादशाह अकबर के किसी भी आदेश को नहीं ठुकराया था फिर चाहे वो कितना भी कठिन क्यों ना हो। उसने आदेश को तुरंत स्वीकार कर लिया। इसके बाद जब रात हुई महाराज अपने कक्ष की तरफ़ या रहे थे तब बादशाह ने ज़ोर – ज़ोर कुछ पीटने की आवाज़ सुनाई दी। ऐसा लग रहा था के कोई हथोड़े के साथ पत्थर तोड़ रहा हो। आवाज़ कुछ ज्यादा तेज़ थी अकबर को सोने में समस्या आ रही थी। अकबर ने अपने सेनिकों को आदेश दिया के वो जाकर पता करें के कौन इतना शोर कर रहा है ? उसे यहाँ लेकर आयो।

जब सेनिक उस तरफ़ गए यहाँ से आवाज़ आ रही थी तो सेनिकों ने देखा के एक लड़की जोर – जोर से कपड़ों को पीट रही है। वो कपड़ों को पीटने में इतनी व्यस्त थी की उसे सेनिकों की आवाज़ भी सुनाई नहीं दी । सेनिकों ने उसे अकबर के सामने पेश किया।

अकबर ने उस लड़की से कहा के ऐसा कौन सा कारण था के तुम इतनी रात में कपड़ों को धो रही हो। उस लड़की ने कहा के महाराज मेरी माता जी मायके गई हुई है और मेरे पिता जी ने एक बच्चे को जन्म दिया है। इसीलिए मुझे यह कपड़ों को धोना पड़ा।

उस लड़की की बात को सुनकर अकबर बादशाह ने कहा के कैसे कोई आदमी बच्चे को जन्म दे सकता है। तब लडकी ने तुरत मुस्कराते हुए उतर दिया महाराज आजकल तो कुछ भी हो सकता है सुना है बैल का दूध भी मिलने लगा है। यह सुनते ही बादशाह अकबर को सारी बात समझ में आ गई।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #14
संसार मे अंधों की संख्या 


“एक दिन अकबर बादशाह का दरवार चल रहा था अचानक ही बादशाह को बीरबल से कुछ सवाल करने की सूझी उसने बीरबल से पूछा के संसार में सबसे अधिक संख्या बाले कौन हैं यो देख सकते हैं या फिर यो देख नहीं सकते हैं ?

बीरबल बोले हजूर इस समय तो इस सवाल का उतर नहीं मिल पाएगा परन्तु मुझे लग रहा है के अंधों की संख्या ज्यादा होगी। अकबर बादशाह अचानक यह उतर सुनकर चौकं गए और बीरबल से बोले तुम्हे अपनी बात साबित करके दिखानी होगी। हजूर ठीक है यह बात में कल साबित करांगा।

अगले ही दिन बीरबल बाज़ार के बीचो – बीच एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बैठ गए और चारपाई को बुनना शुरू कर दिया और बीरबल की दोनों तरफ़ दो आदमी क़ागज और कलम लेकर बैठे हुए थे।

थोड़ी ही देर में वहां पर बहुत सारे लोग इक्कठे होने शुरू हो गए और यो भी व्यक्ति वहां पर आता एक ही सवाल पूछता बीरबल यह तुम क्या कर रहे हो ? और बीरबल की दोनों तरफ यो आदमी बैठे हुए थे वो ऐसा सवाल पूछने बालों के नाम लिख रहे थे। जब अकबर बादशाह को इस ख़बर के बारे में पता चला के बीरबल बाज़ार में एक चारपाई बुन रहे हैं तो वो भी वहां पर आ गए और वहां पहुँचते ही अकबर बादशाह ने बीरबल से भी वहीँ प्रश्न पूछा बीरबल यह तुम क्या कर रहे हो ?

बीरबल ने अपनी तरफ बैठे हुए दोनों आदमियों से अकबर बादशाह का भी नाम लिखने के लिए कहा तभी अकबर बादशाह ने वो लिखे हुए नामों की सूची उस आदमी से ले ली उस पर लिखा था अंधे लोगों की सूची

अकबर बादशाह ने आपना नाम सूची में देखकर बीरबल से बोले मेरा नाम इस सूची में क्यों लिखा है ? इसके बाद बीरबल ने उतर दिया हजूर आपने भी देखा के चारपाई बुना रहा हूँ फिर आपने मुझसे प्रश्न किया के आप क्या कर रहे हो ?

बीरबल ने कहा हजूर अब तो आपको मेरी बात पर यकीन हो गया होगा के संसार में अंधों की संख्या ज्यादा है बीरबल की इस हुशियारी से अकबर बादशाह बहुत खुश हुए और उसे ईनाम भी दिया।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #15
“सौदागर की बुझारत

  – एक समय की बात है के दिन राजा अकबर का दरवार लगा हुआ था । उस राजा के दरवार में सभी सेनापति और दरवारी अपने – अपने काम में लगे हुए थे। एक दिन उनके राज्य में एक सौदागर राजा के महल में आया। उसने बाहर खड़े पहिरेदारों को बताया के में एक सौदागर हूं और राजा से मिलना चाहता हूं। एक सिपाही अंदर गया और उसने राजा को सारी बात बताई। राजा ने तुरंत उस सौदागर को अंदर बुलाया।

दरवार में आने पर राजा ने सौदागर से पूछा के वो किस चीज़ का व्यापारी है ? सौदागर ने तुरंत जवाब दिया हजूर में बुझारतों का सौदागर हूं। में हर राज्य में जाकर राजे को एक बुझारत पाता हूं और साथ में हीरे – जवाहरत की भी शर्त लगाता हूं। परन्तु अभी तक किसी भी राज्य का राजा मुझसे शर्त नहीं जीत सका । हजूर में आपको एक बुझारत पाता हूं अगर आपने यह बुझारत हल कर दी तो जितने भी हीरे – जवाहरात मेरे पास हैं वो सब आपके और अगर नहीं बूझ पाए तो जितने भी मेरे पास  हीरे – जवाहरात हैं उतने आपको देने होंगे बोलो मंजूर है आपको यह शर्त ?  यह सुनते ही सारे दरवार में शांति छा गई अब राजा को यह बुझारत उसकी इज्जत का सवाल लगने लगी। उसने सौदागर की शर्त को स्वीकार कर लिया।

कोकल व्हेल कोकल व्हेल

काटी न जाए कोकल व्हेल

कहियों कुहाड़ियों का लग गया ढेर


कोकल व्हेल कोकल व्हेल

काटी न जाए कोकल व्हेल

बुझारत पाने के बाद सौदागर ने राजे को चार दिनों का समय दिया और वहां से चला गया। पूरे दरवार में पहले किसी ने भी ऐसी बुझारत नहीं सुनी थी। पहला दिन बीत गया पर किसी को भी कोई उतर नहीं मिला। दूसरा दिन भी आ गया और राजे का वजीर बीरबल बुझारत को हल करने के लिए पूरी कोशिश कर रहा था। वो सोच रहा था वो चीज़ काटी जा सकदी है जिसको हम देख सकते हैं और इस बुझारत का जवाब वो ही है जिसको हम देख सकते हैं। यह सोचता – सोचता वो एक बगीचे में पहुँच गया। यहां पर कुछ आदमी पेड़ लगा रहे थे। बीरबल उनके पास गया। अचानक एक मजदूर ने बीरबल  के धरती उपर पे रहे परछावें से कही से खड्डा खोदने के लिए जब टक मारा। बीरबल ने जब देखा के उसकी परछाईं खड्डे के अंदर चली गई।

अब बीरबल को उस बुझारत का उतर मिल गया था। क्योंकि किसी भी चीज़ के साथ परछाईं को नहीं काटा जा सकता है। वो तुरंत राज महल पहुंचा और तुरंत उसने सौदागर को बुलाया। वजीर ने तुरंत सौदगर से कहा के आपकी बुझारत का उतर परछावां है। परछावें को किसी भी चीज़ से नहीं काट सकते। सौदागर यह जवाब सुनकर हैरान रह गया और शर्त के मुताबिक हीरे – जवाहरात देकर वहां से चला गया। राजा अपने वजीर बीरबल से बहुत खुश हुआ और उसे ढेर सारा इनाम दिया।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #16
दुष्ट नाई की दुर्दशा 


“जैसा कि हम सभी जानते हैं, बीरबल केवल सम्राट अकबर के पसंदीदा मंत्री नहीं थे, बल्कि उनके लिए तैयार बुद्धि और ज्ञान की वजह से अधिकांश मंत्री आम लोगों से प्यार करते थे। लोग निजी मामलों की सलाह के लिए दूर-दूर तक उनके पास आते थे। हालांकि, उन मंत्रियों का एक समूह था जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता से जलन हो रहा था और उन्हें बेहद नापसंद कर दिया था। उन्होंने बाहरी रूप से प्रशंसा और प्रशंसा के साथ उसे दिखाया, लेकिन अंदर पर, वे उसे मारने के लिए एक साजिश से बचने लगे।

एक दिन उन्होंने एक योजना के साथ राजा के नाई से संपर्क किया। चूंकि नाई राजा के बहुत करीबी थे, उन्होंने उनसे कहा कि उन्हें बीरबल से स्थायी रूप से छुटकारा पाने में मदद करें। और निश्चित रूप से, उन्होंने बदले में उन्हें एक बड़ी राशि का वादा किया था दुष्ट नाई आसानी से सहमत हुए

अगली बार जब राजा को उनकी सेवाओं की आवश्यकता थी, नाई ने सम्राट के पिता के बारे में एक बातचीत शुरू कर दी थी, जिसने सेवा भी की थी। उन्होंने अपने ठीक, रेशमी-चिकनी बालों की प्रशंसा की। और फिर एक विचार के रूप में, उन्होंने राजा से कहा कि वह इस तरह की महान समृद्धि का आनंद ले रहे हैं, क्या उसने अपने पूर्वजों के कल्याण के लिए कुछ भी करने का प्रयास किया था?

राजा इस तरह के खर्चीली मूर्खता पर उग्र था और नाई को बताया कि यह कुछ भी करना संभव नहीं था क्योंकि वे पहले ही मर चुके थे। नाई ने उल्लेख किया कि वह एक जादूगर के बारे में जानता था जो मदद से आ सकता था। जादूगर अपने पिता के कल्याण के बारे में पूछताछ करने के लिए स्वर्ग तक एक व्यक्ति को भेज सकता है लेकिन निश्चित रूप से इस व्यक्ति को सावधानीपूर्वक चुनना होगा; उन्हें जादूगर के निर्देशों का पालन करने के साथ-साथ मौके पर निर्णय लेने के लिए पर्याप्त बुद्धिमान होना होगा। वह बुद्धिमान, बुद्धिमान और जिम्मेदार होना चाहिए। नाई ने नौकरी के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का सुझाव दिया – सभी मंत्रियों के बुद्धिमान, बीरबल

राजा अपने मृत पिता से सुनवाई के बारे में बहुत उत्साहित थे और नाई को आगे बढ़ने के लिए कहा और तुरंत व्यवस्था बना ली उसने पूछा कि क्या किया जाना चाहिए था। नाई ने समझाया कि वे बीरबल को एक मिस्र में कब्रिस्तान के मैदान में ले जाएंगे और एक प्योर प्रकाश देंगे। जादूगर तब कुछ ‘मंत्र’ का जिक्र करेंगे क्योंकि बीरबल धुआं से आकाश तक चढ़ेंगे। जप से आग से बीरिल को बचाने में मदद मिलेगी।

राजा ने खुशी से इस योजना के बीरबल को सूचित किया बीरबल ने कहा कि उन्होंने यह एक शानदार विचार सोचा था और इसके पीछे दिमाग को जानना चाहता था। सीखते हुए कि यह नाई का विचार था, वह स्वर्ग जाने के लिए इस शर्त पर सहमत हुए कि उन्हें लंबी यात्रा के लिए एक बड़ी राशि दी गई है और साथ ही एक महीने का समय अपने परिवार को व्यवस्थित करने के लिए दिया गया था, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हुई हो । राजा दोनों शर्तों पर सहमत हुए

इस महीने की अवधि में, उन्होंने कुछ भरोसेमंद पुरुषों को अंतिम संस्कार के मैदान से अपने घर तक एक सुरंग बनाने के लिए मिला। और उदगम के दिन, चिल्लाया जाने के बाद, बिरबल सुरंग के छिपे हुए द्वार से भाग गए। वह अपने घर में गायब हो गए जहां उन्होंने कुछ महीनों तक छुपा दिया, जबकि उनके बाल और दाढ़ी लंबे और अनियंत्रित हो गए।

इस बीच, उनके दुश्मनों को बहुत खुशी थी क्योंकि उन्होंने सोचा था कि उन्होंने बीरबल के आखिरी को देखा था। फिर कई दिन बाद, कई महीनों में बीरबल महल में राजा के पिता की खबरों के साथ पहुंचे। राजा उसे देखने के लिए बेहद खुश था और प्रश्नों के दायरे के साथ तैयार था। बीरबल ने राजा को बताया कि उनके पिता बेहतरीन आत्माओं में थे और एक को छोड़कर सभी सुविधाएं प्रदान की गई थीं।

राजा जानना चाहता था कि क्या कमी थी क्योंकि अब उसने सोचा कि उसे चीजें और लोगों को स्वर्ग में भेजना एक रास्ता मिल गया है। बीरबल ने उत्तर दिया कि स्वर्ग में कोई नली नहीं थी, यही वजह है कि उसे अपनी दाढ़ी बढ़ाने के लिए मजबूर भी किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने एक अच्छा नाई के लिए कहा था।

इसलिए राजा ने स्वर्ग में अपने पिता की सेवा करने के लिए अपने ही नाई को भेजने का फैसला किया। उसने नाई और जादूगर दोनों को स्वर्ग में भेजने के लिए तैयार करने के लिए बुलाया। नाई अपने बचाव में बिल्कुल कुछ भी नहीं कह सकता क्योंकि वह अपने ही जाल में पकड़ा गया था। और एक बार पायर को जलाया गया, मौके पर वह मर गया।

फिर भी बीरबल के खिलाफ फिर से विरोध करने की हिम्मत नहीं हुई।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #17
सौ सोने के सिक्के और बीरबल 


“सम्राट अकबर के शासनकाल में बीरबल का ज्ञान अद्वितीय था लेकिन अकबर के भाई बहुत ही ईर्ष्या करते थे। उन्होंने सम्राट को बीरबल की सेवाएं देने के लिए कहा और उसे अपने स्थान पर नियुक्त किया। उन्होंने पर्याप्त आश्वासन दिया कि वे बीरबल की तुलना में अधिक कुशल और सक्षम साबित होंगे। अकबर इस मामले पर निर्णय लेने से पहले, यह खबर बीरबल पहुंची।

बीरबल ने इस्तीफा दे दिया और छोड़ दिया। अकबर के भाई को बीरबल के स्थान पर मंत्री बनाया गया था। अकबर ने नए मंत्री का परीक्षण करने का फैसला किया। उसने उसे तीन सौ सोने के सिक्कों दिए और कहा, “इन सोने के सिक्के खर्च करो, इस तरह, मुझे इस जीवन में सौ सोने के सिक्के मिले हैं; दूसरे विश्व में एक सौ सोने के सिक्कों और न तो यहां और न ही एक सौ सोने के सिक्के भी हैं। ”

मंत्री ने पूरी स्थिति को भ्रम और निराशा की उलझन में पाया। उन्होंने रात भर नींद लेते हुए चिंता की कि वह इस गड़बड़ी से खुद को कैसे निकालेगा। मंडलियों में सोचकर उसे पागल हो जाना था। आखिरकार, अपनी पत्नी की सलाह पर, उन्होंने बीरबाल की मदद की मांग की बीरबल ने कहा, “बस मुझे सोने के सिक्के दे दो। मैं बाकी को संभालना होगा। ”

बीरबल शहर की सड़कों पर अपने हाथ में सोने के सिक्कों के बैग पकड़ कर चला गया। उसने अपने बेटे की शादी का जश्न मनाते हुए एक अमीर व्यापारी को देखा बीरबल ने उसे सौ सोने के सिक्के दिए और विनम्रतापूर्वक झुका दिया, “सम्राट अकबर आपको अपने बेटे की शादी के लिए अपनी शुभकामनाएं और आशीर्वाद भेजता है। कृपया उसने जो उपहार भेजा है उसे स्वीकार करें। “व्यापारी ने यह सम्मान महसूस किया कि राजा ने इस तरह के एक अमूल्य उपहार के साथ एक विशेष दूत भेजा था। उन्होंने बीरबल को सम्मानित किया और उन्हें राजाओं के लिए एक उपहार के तौर पर उपहारों की एक बड़ी संख्या और सोने के सिक्कों का बैग दिया।

इसके बाद, बीरबल उस शहर के क्षेत्र में गया, जहां गरीब लोग रहते थे। वहां उन्होंने एक सौ सोने के सिक्के के बदले में भोजन और कपड़े खरीदे और उन्हें सम्राट के नाम पर वितरित किया।

जब वह शहर लौट आया तो उन्होंने संगीत और नृत्य के एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया। उसने उस पर एक सौ सोने के सिक्के बिताए।

अगले दिन अकबर के दरबार में बीरबल ने घोषणा की और उसने घोषणा की कि उसने जो कुछ किया वह राजा ने अपने भाई को करने के लिए कहा था। सम्राट जानना चाहता था कि उसने यह कैसे किया था। बीरबल ने सभी घटनाओं के अनुक्रमों को दोहराया और फिर कहा, “मैंने अपने बेटे के विवाह के लिए व्यापारी को दिया धन – इस धरती पर आपको वापस मिल गया है। जो पैसा मैंने गरीबों के लिए भोजन और कपड़े खरीदने पर खर्च किया – आप इसे दूसरी दुनिया में प्राप्त करेंगे मैंने संगीत संगीत कार्यक्रम पर खर्च किया धन – आप न तो यहां और न ही मिलेगा। “अकबर के भाई ने अपनी गलती को समझ लिया और इस्तीफा दे दिया। बीरबल को उनकी जगह वापस मिल गया।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #18
तीन गधों का बोझ 

“एक बार अकबर अपने बेटो के साथ नदी किनारे आये और उनके साथ बीरबल भी थे | दोनों बेटो ने कपड़े उतार दिए और नदी में नहाने के लिए उतर गये | बीरबल को उन्होंने कपड़ो की रखवाली करने के लिए कहा |

बीरबल नदी किनारे बैठकर उन दोनों के आने का इंतजार करने लगे | थोड़ी देर बाद अकबर बादशाह वहा आये और उन्होंने भी अपने कपड़े उतारकर नदी में छलांग लगा दी | बीरबल ने उनकी कपड़े भी अपने कन्धो पर रख लिए |

नदी में नहाकर आने के बाद  ,बीरबल को इस अवस्था में खड़ा देखा तो अकबर को शरारत सूझी | उन्होंने बीरबल से कहा “बीरबल ,तुम्हे देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे धोबी का गधा कपड़े लादकर घाट पर खड़ा हो “|

बीरबल ने झट से जवाब दिया “हुजुर ! धोबी के गधे पर तो केवल एक ही गधे का बोझ होता है लेकिन मुझ पर तो तीन तीन गधो का बोझ है “
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #19
अपना वादा भूल गये 


“अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे? एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले।

बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”? बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”

तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।

और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #20
जोरु का गुलाम 


“बादशाह अकबर और बीरबल बातें कर रहे थे। बात मियां-बीवी के रिश्ते पर चल निकली तो बीरबल ने कहा—”अधिकतर मर्द जोरू के गुलाम होते हैं और अपनी बीवी से डरते हैं।” “मैं नहीं मानता।” बादशाह ने कहा। “हुजूर, मैं सिद्ध कर सकता हूं।” बीरबल ने कहा।

“सिद्ध करो” “ठीक है, आप आज ही से आदेश जारी करें कि किसी के भी अपने बीवी से डरने की बात साबित हो जाती है तो उसे एक मुर्गा दरबार में बीरबल के पास में जमा करना होगा।” बादशाह ने आदेश जारी कर दिया।

कुछ ही दिनों में बीरबल के पास ढेरों मुर्गे जमा हो गए, तब उसने बादशाह से कहा—”हुजूर, अब तो इतने मुर्गे जमा हो गए हैं कि आप मुर्गीखाना खोल सकते हैं। अतः अपना आदेश वापस ले लें।”

बादशाह को न जाने क्या मजाक सूझा कि उन्होंने अपना आदेश वापस लेने से इंकार कर दिया। खीजकर बीरबल लौट गया। अगले दिन बीरबल दरबार में आया तो बादशाह अकबर से बोला—हुजूर, विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पड़ोसी राजा की पुत्री बेहद खूबसूरत है, आप कहें तो आपके विवाह का प्रस्ताव भेजूं ?”

“यह क्या कह रहे हो तुम, कुछ तो सोचो, जनानाखाने में पहले ही दो हैं, अगर उन्होंने सुन लिया तो मेरी खैर नहीं।” बादशाह ने कहा। “हुजूर, दो मुर्गे आप भी दे दें।” बीरबल ने कहा।

बीरबल की बात सुनकर बादशाह झेंप गए। उन्होंने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #21
सबसे बड़ा मनहूस कौन


“एक बार अकबर बिस्तर पर पड़े-पड़े पानी मांगे जा रहे थे। आसपास कोई खास निजी सेवक था नहीं। सो महल का कूड़ा कचरा साफ करने वाले निम्न दर्जे के मामूली नौकर ने हिम्मत कर के बादशाह को पानी का गिलास दिया। अकबर उसे अपने कमरे में देख कर चौक गए। लेकिन प्यास इतनी लगी थी कि वे खुद को रोक नहीं पाए और पानी ले लिया।

तभी वहां अकबर के खास सेवक आ पहुंचे। उन्होने फौरन उस कचरा साफ करने वाले नौकर को कमरे से बाहर कर दिया। और सभी अकबर की चापलूसी करने लगे।

दोपहर हुई तो अकबर का पेट खराब हो गया। हकीम को बुलाया गया। पर फिर भी अकबर की हालत में सुधार नहीं हुआ। अब राज वैद्य आए, उनके साथ राज्य ज्योतिष भी थे। उन्होने कहा की शायद आप पर किसी मनहूस व्यक्ति का साया पड़ा है, इसीलिए आप की तबीयत खराब हुई है।

अकबर बादशाह को तुरंत उस कचरा साफ करने वाले नौकर का खयाल आया। उन्होने कहा कि आज सुबह मैंने उस कचरा साफ करने वाले के हाथ से पानी पिया था इसीलिए मेरे साथ यह सब हुआ है। उन्होने गुस्से में उस नौकर को मौत की सज़ा दे दी।  थोड़ी ही देर में सिपाहीयों ने उस नौकर को कारागार में बंद कर दिया।

बीरबल को जब इस बात का पता लगा तो वह उस नौकर के पास गए और उसे सांत्वना देते हुए कहा कि वह उसे बचा लेंगे।

बीरबल तुरंत अकबर के पास गए और उनका हाल-चाल लिया। तब अकबर ने बताया कि-

हमारे राज्य का सब से बड़ा मनहूस मुझे बीमार कर गया।

यह बात सुन कर बीरबल हंस पड़े। तब अकबर को गुस्सा आया और वह बोले कि तुम्हें मेरी यह हालत देख कर मज़ा आ रहा है? तो बीरबल ने कहा कि नहीं नहीं महाराज एक बात पूछनी थी। अगर मैं उस नौकर से बड़ा मनहूस आप को ढूंढ कर दूँ तो आप क्या करेंगे? क्या आप इस नौकर को सज़ा से मुक्ति दे देंगे? अकबर ने तुरंत बीरबल की यह शर्त मान ली। और पूछा की बताओ उस नौकर से बड़ा मनहूस कौन है?

अब बीरबल बोले,  “उस नौकर से बड़े मनहूस तो आप खुद हैं। उस नौकर के हाथ पानी पीने से आप की तबियत खराब हुई, आप बिस्तर पर आ गए। लेकिन उसका तो सोचिए, वह तो आप की प्यास बुझाने आया था। आप की खिदमद कर रहा था। सुबह सुबह आप की शक्ल देखने से उसकी तो जान पर बन आई है। उसे तो मौत की सज़ा मिल गयी। तो इस लिए उस से बड़े मनहूस तो आप हुए। अब आप खुद को मौत की सज़ा मत दीजिएगा। चूँकि हम सब आप से बहुत प्यार करते हैं।”

बीरबल की यह चतुराई भरी बात सुन कर, अकबर बिस्तर पर पड़े-पड़े हंसने लगे। उन्होने उसी वक्त उस गरीब नौकर को छोड़ देने के आदेश दिये। और उसे इनाम भी दिया। और मनहूसियत का अंधविश्वासी सुझाव देने वाले राज्य ज्योतिष को उसी वक्त घोड़े के तबेले में मुनीमगिरी के काम में लगा दिया गया।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #22
अकबर का साला

“अकबर का साला हमेशा से ही बीरबल की जगह लेना चाहता था। अकबर जानते थे कि बीरबल की जगह ले सके ऐसा बुद्धिमान इस संसार में कोई नहीं है। फिर भी जोरू के भाई को वह सीधी ‘ना’ नहीं बोल सकते थे। ऐसा कर के वह अपनी लाडली बेगम की बेरुखी मोल नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए उन्होने अपने साले साहब को एक कोयले से भरी बोरी दे दी और कहा कि-

जाओ और इसे हमारे राज्य के सबसे  मक्कार और लालची सेठ – सेठ दमड़ीलाल  को बेचकर दिखाओ , अगर तुम यह काम कर गए तो तुम्हें बीरबल की जगह वज़ीर बना दूंगा।

अकबर की इस अजीब शर्त को सुन कर साला अचंभे में पड़ गया। वह कोयले की बोरी ले कर चला तो गया। पर उसे पता था कि वह सेठ किसी की बातो में नहीं आने वाला ऊपर से वह उल्टा उसे ही चूना लगा देगा। हुआ भी यही सेठ दमड़ीलाल ने कोयले की बोरी के बदले एक ढेला भी देने से इनकार कर दिया।

साला अपना सा मुंह लेकर महल वापस लौट आया और अपनी हार स्वीकार कर ली.

अब अकबर ने वही काम बीरबल को करने को कहा।

बीरबल कुछ सोचे और फिर बोले कि सेठ दमड़ीलाल जैसे मक्कार और लालची सेठ को यह कोयले की बोरी क्या मैं सिर्फ कोयले का एक टुकड़ा ही दस हज़ार रूपये में बेच आऊंगा। यह बोल कर वह तुरंत वहाँ से रवाना हो गए।

सबसे पहले उसने एक दरज़ी के पास जा कर एक मखमली कुर्ता सिलवाया। हीरे-मोती वाली मालाएँ गले में डाली। महंगी जूती पहनी और कोयले को बारीक सुरमे जैसा पिसवा लिया।

फिर उसने पिसे कोयले को एक सुरमे की छोटी चमकदार डिब्बी में भर लिया। इसके बाद बीरबल ने अपना भेष बदल लिया और एक मेहमानघर में रुक कर इश्तिहार दे दिया कि बगदाद से बड़े शेख आए हैं। जो करिश्माई सुरमा बेचते हैं। जिसे आँखों में लगाने से मरे हुए पूर्वज  दिख जाते हैं और यदि उन्होंने कहीं कोई धन गाड़ा है तो उसका पता बताते हैं। यह बात शहर में आग की तरह फ़ैली।

सेठ दमड़ीलाल को भी ये बात पता चली। उसने सोचा ज़रूर उसके पूर्वजों ने कहीं न कहीं धन गाड़ा होगा। उसने तुरंत शेख बने बीरबल से सम्पर्क किया और सुरमे की डिब्बी खरीदने की पेशकश की। शेख ने डिब्बी के 20 हज़ार रुपये मांगे और मोल-भाव करते-करते 10 हज़ार में बात तय हुई।

पर सेठ भी होशियार था, उसने कहा मैं अभी तुरंत ये सुरमा लगाऊंगा और अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं पैसे वापस ले लूँगा।

बीरबल बोला, “बिलकुल आप ऐसा कर सकते हैं, चलिए शहर के चौराहे पर चलिए और वहां इसे जांच लीजिये।”

सुरमे का चमत्कार देखने के लिए भीड़ इकठ्ठा हो गयी।

तब बीरबल ने ऊँची आवाज़ में कहा, “ये सेठ अभी ये चमत्कारी सुरमा लगायेंगे और अगर ये उन्ही की औलाद हैं जिन्हें ये अपना माँ-बाप समझते हैं तो इन्हें इनके पूर्वज दिखाई देंगे और गड़े धन के बारे में बताएँगे। लेकिन अगर आपके माँ-बाप में से किसी ने भी बेईमानी की होगी और आप उनकी असल औलाद नहीं होंगे तो आपको कुछ भी नहीं दिखेगा।

और ऐसा कहते ही बीरबल ने सेठ की आँखों में सुरमा लगा दिया।

फिर क्या था, सिर खुजाते हुए सेठ ने आँखें खोली। अब दिखना तो कुछ था नहीं, पर सेठ करे भी तो क्या करे!

अपनी इज्ज़त बचाने के लिए सेठ ने दस हज़ार बीरबल के हाथ थमा दिये। और मुंह फुलाते हुए आगे बढ़ गए।

बीरबल फ़ौरन अकबर के पास पहुंचे और रुपये थमाते हुए सारी कहानी सुना दी।

अकबर का साला बिना कुछ कहे अपने घर लौट गया। और अकबर-बीरबल एक दूसरे को देख कर मंद-मंद मुसकाने लगे। इस किस्से के बाद फिर कभी अकबर के साले ने बीरबल का स्थान नहीं मांगा।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #23
मोम का शेर


“सर्दियों के दिन थे, अकबर का दरबार लगा हुआ था। तभी फारस के राजा का भेजा एक दूत दरबार में उपस्थित हुआ।

राजा को नीचा दिखाने के लिए फारस के राजा ने मोम से बना शेर का एक पुतला बनवाया था और उसे पिंजरे में बंद कर के दूत के हाथों अकबर को भिजवाया, और उन्हे चुनौती दी की इस शेर को पिंजरा खोले बिना बाहर निकाल कर दिखाएं।

बीरबल की अनुपस्थिति के कारण अकबर सोच पड़ गए की अब इस समस्या को कैसे सुलझाया जाए। अकबर ने सोचा कि अगर दी हुई चुनौती पार नहीं की गयी तो जग हसायी होगी। इतने में ही परम चतुर, ज्ञान गुणवान बीरबल आ गए। और उन्होने मामला हाथ में ले लिया।

बीरबल ने एक गरम सरिया मंगवाया और पिंजरे में कैद  मोम के शेर को पिंजरे में ही पिघला डाला। देखते-देखते मोम  पिघल कर बाहर निकल गया ।

अकबर अपने सलाहकार बीरबल की इस चतुराई से काफी प्रसन्न हुए और फारस के राजा ने फिर कभी अकबर को चुनौती नहीं दी।

Moral of Hindi story: बुद्धि के बल पर बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है.
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #24
तीन सवाल


“एक बार सभी दरबारी, बीरबल एवं राजा अकबर दरबार मे बैठे थे | सभी लोग दरबार के अलग अलग पदो एवं मंत्री पदो के बारे मे विचार विमर्श कर रहे थे | उनमें से एक मंत्री, जो महामंत्री का पद पाना चाहता था। उसने मन ही मन एक योजना बनाई। उसे मालूम था कि बीरबल उससे ज्यादा बुद्धिमान था, लेकिन फिर भी वह मुख्य सलाहकार का पद पाना चाहता था।  

एक दिन दरबार में अकबर ने बीरबल की बहुत तारीफ की। यह सब सुनकर उस मंत्री को बहुत गुस्सा आया। उसने महाराज से कहा कि यदि बीरबल मेरे तीन सवालों का उत्तर सही-सही दे देता है तो मैं उसकी बुद्धिमता को स्वीकार कर लूंगा। यदि नहीं तो इससे यह सिद्ध होता है कि वह आपका चापलूस है। अकबर को मालूम था कि बीरबल उसके सवालों का जवाब जरूर दे देगा इसलिए उन्होंने उस मंत्री की बात मान ली।

उस मंत्री के तीन सवाल थे –

1. आकाश में कितने तारे हैं?
2. धरती का केन्द्र कहां है?
3. सारे संसार में कितने स्त्री और कितने पुरूष हैं?

अकबर ने बीरबल पर भरोसा जताते हुए। उसे इन सवालों के जवाब देने के लिए कहा और साथ ही यह शर्त रखी कि यदि वह इनका उत्तर नहीं जानता है तो मुख्य सलाहकार का पद छोड़ने के लिए तैयार रहे।
बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत मैं इन प्रश्नों के उत्तर जानता हूं, सुनिए।

पहले सवाल का जवाब- बीरबल ने एक भेड़ मंगवाई और कहा जितने बाल इस भेड़ के शरीर पर हैं। आकाश में उतने ही तारे हैं। उन्होंने उस मंत्री की ओर देख कर कहा आप गिनकर तसल्ली कर लो।

दूसरा सवाल का जवाब – बीरबल ने ज़मीन पर कुछ लकीरें खिंची और कुछ हिसाब लगाया। फिर एक लोहे की छड़ मंगवाई। उसे एक जगह गाड़ दिया और बीरबल ने बादशाह से कहा – बादशाह बिल्कुल इसी जगह धरती का केन्द्र है, चाहें तो आप खुद जांच लें। बादशाह बोले ठीक है अब तीसरे सवाल के बारे में कहो।

तीसरे सवाल का जवाब- बीरबल ने कहा अब जहांपनाह तीसरे सवाल का जवाब बड़ा मुश्किल है, क्योंकि इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं जो ना तो स्त्री की श्रेणी में आते हैं, ना ही पुरुषों की श्रेणी में। उनमें से कुछ लोग तो हमारे दरबार में भी हैं, जैसे कि ये मंत्री जी। महाराज यदि आप इनको मौत के घाट उतरवा दें तो मैं स्त्री-पुरूष की सही-सही संख्या बता सकता हूं।

अब मंत्रीजी सवालों का जवाब छोड़कर थर-थर कांपने लगे और महाराज से बोले,”महाराज बस-बस मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल गया। मैं बीरबल की बुद्धिमानी को मान गया हूं। महाराज हमेशा की तरह बीरबल की तरफ पीठ करके हंसने लगे और इसी बीच वह मंत्री दरबार से भाग गया।

सीख: कभी किसी परीक्षा से घबराएं नहीं, जो सवाल जितने अजीब होते हैं, उनके जवाब भी उसी तरह दिए जा सकते हैं। अगर दिमाग को शांत और सक्रिय रखा जाए तो हम किसी भी सवाल का जवाब दे सकते हैं।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #25
बीरबल की तीरंदाजी


“एक बार अकबर का दरबार सजा हुआ था | अकबर बीरबल की तारीफ कर रहे थे | बीरबल की तारीफ़ सुनकर सारे दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे | एक दरबारी ने बीरबल पर हस्ते हुए कहा -“बीरबल, तुम सिर्फ बातो के तीरंदाज हो, अगर तीर कमान पकड़ कर तीरंदाज करने पड़े तो हाथ पाँव फूल जायेंगे | 

यह बात सुनकर अकबर ने बीरबल से कहा – ‘बीरबल तुम दरबारीयो को अपने अचूक तीरंदाजी का कमाल दिखाओ |’

सबने सोचा – आज तो बीरबल फस गया है | पर बीरबल कहाँ हार मानने वाला था | बीरबल ने कहा – ‘हुजूर, मै साबित कर दूंगा मै बातो की साथ साथ अच्छा तीरंदाज भी हूँ |

सभी दरबारी, अकबर एवं बीरबल मैदान मे जा पहुंचे | बीरबल के हाथो मे तीर कमान दिया गया और दूरी पर एक लक्ष्य रखकर निशाना साधने को कहा गया |

बीरबल ने पहला तीर चलाया तो निशाना चूक गया| वह तुरंत बोला – ‘यह थी बादशाह के सालेजी की तीरंदाजी|’ बीरबल का दूसरा तीर भी चूक गया | इस पर बीरबल बोला -‘यह है राजा टोडरमल की तीरंदाजी |’ सयोंग से तीसरा तीर सीधा निशाने पर लगा |

बीरबल गर्व से बोला – ‘और इसे कहते है बीरबल की तीरंदाजी |’ अकबर खिलखिलाकर हंस पड़े | वे समझ गए कि बीरबल ने यहाँ भी बातो कि तीरंदाजी से सब को हरा दिया |
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #26
बीरबल के 100 कौड़ें


“जब महेश दास बड़े हुए तो उन्होंने कुछ मेहरे जो उन्होंने बचा कर रखी थी, उसके साथ राजकीय अंगूठी ली तथा अपनी मां से विदा लेकर बादशाह की राजधानी फतेहपुर सीकरी की तरफ चल दिए।

राजधानी में पहुंचकर महेश दास आश्चर्य चकित रह गए। बाजारों की चकाचोंध वह रौनक जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। बाजारों में बिकते रंग-बिरंगे वस्त्र गहने ऊन से बनी टोपियां देखकर उनकी आंखें खुली की खुली रह गयी। बड़े-बड़े ऊंट, पानी बेचने वालों की आवाजें, जादूगरों द्वारा जुटाई गई भीड़ मंदिरों से आती आवाज़े, सब उसे आकर्षित कर रही थी।

लेकिन महेश अपनी यात्रा के मकसद को बिना भूले महल की तरफ चल दिया।  महल के द्वार पर की गई सुंदर नक्काशी को देखकर महेश को लगा कि यह बादशाह के महल का प्रवेश द्वार है लेकिन वह तो शाही दरबार का बाहरी छोर था। महेश जब महल के द्वार पर पहुंचा तो द्वारपाल ने उसका रास्ता रोकते हुए पूछा” कहां जा रहे हो?”

“मैं बादशाह सलामत से मिलने आया हूं।”  महेश ने शांतिपूर्वक उत्तर दिया।

द्वारपाल ने कहा ” मूर्ख,  तुम क्या सोचते हो कि बादशाह अकबर को केवल यही कार्य रह गया है की वो हर किसी के साथ मुलाकात करते रहें।” उसने महेश को वहां से लौट जाने के लिए कहा। लेकिन जैसे ही महेश ने अकबर की दी हुई शाही अंगूठी निकाली, सैनिक चुप हो गया और दूसरे सैनिक ने राजसी मोहर को पहचान लिया।

यह देख कर उसने महेश को अंदर जाने की आज्ञा दी पर वह उसे ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहता था। उसने तब महेश से कहा कि तुम एक शर्त पर अंदर जा सकते हो। “तुम्हें बादशाह से जो भी मिलेगा तुम मुझे उसका आधा दोगे।”

महेश ने मुस्कुराते हुए कहा,” ठीक है, और वहां से चला गया।  महेश उस सैनिक को सबक सिखाना चाहता था ताकि वह फिर भ्रष्ट कार्य ना करे।

महेश राजकीय बगीचों से होता हुआ,  जहां ठंडे पानी के फव्वारे थे,  पूरी हवा में गुलाब की महक थी, ठंडी हवा बह रही थी,  एक आलीशान भवन तक पहुंचा जहां पर सभी दरबारी महंगे वस्त्र पहने हुए थे। उन सब को देख कर महेश दंग रह गया।

अंत में उसकी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो एक ऊंचे आसन पर बैठा था जो कि सोने से बना हुआ था और उस पर हीरे मोती जड़े थे, उसे देखकर महेश को समझते देर नहीं लगी कि यही अकबर हैं।

दरबारियों को पीछे धकेलता हुआ बादशाह के तख्त तक जा पहुंचा और बोला- “हे बादशाह आप की शान में कभी कोई कमी ना आए” अकबर मुस्कुराए और बोले, “बताओ तुम्हें क्या चाहिए? महेश, बोला, “मैं यहां आपके बुलाने पर आया हूं और यह कहते हुए उसने वह अंगूठी बादशाह को वापस कर दी जो कुछ साल पहले बादशाह ने उसे दी थी।

अकबर ने हंसते हुए महेश का स्वागत किया और पूछा, “मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूं तुम्हें क्या दे सकता हूं?” दरबारी उस अजीब से दिखने वाले व्यक्ति को देखकर हैरान थे आखिर यह कौन है जिसे बादशाह इतना सम्मान दे रहे हैं। महेश ने कुछ पल सोचा और कहा “आप मुझे 100 कौड़े मारने की सजा दीजिए।”

यह सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया। बादशाह अचरज से बोले, “क्या कहते हो?” तुमने तो कुछ गलत नहीं किया जिसके लिए तुम्हें सौ कोड़े दिए जाएं।”

“क्या बादशाह सलामत मेरी दिली इच्छा को पूरा करने के वायदे से पीछे हट रहे हैं?”

“नहीं, एक राजा कभी अपने शब्दों से पीछे नहीं हटता।”

अकबर ने बड़े हिचकिचाते हुए सैनिक को आदेश दिया कि महेश को सौ कोड़े लगाए जाएं।” महेश ने अपनी पीठ पर हर कोड़े का बार बिना किसी आवाज के सहन किया।

है जैसे ही पचासवां कोडा महेश की पीठ पर पड़ा वह एकदम अलग कूद कर चिल्लाया- “रुको”।

तब अकबर भी हैरान होते हुए बोले “अब तुम्हें समझ आया कि तुम कितने पागल हो?” नहीं जहांपना मैं जब महल में आपको देखने आना चाहता था तब मुझे महल के अंदर आने की आज्ञा इसी शर्त पर मिली थी कि मुझे आपसे जो भी कुछ मिलेगा उसका आधा उस सेवक को दिया जाएगा इसलिए कृपा करके बाकी कोड़े उसे लगाए जाएं।

पूरा दरबार हंसी के ठहाकों से गूंज उठा, जिसमें अकबर की हंसी सबसे ऊंची थी। इसी के साथ, उस सैनिक को दरबार में आकर अपनी घूस लेने की आज्ञा दी गयी।

अकबर ने महेश से कहा, ” तुम अब भी इतने ही बहादुर हो जितने पहले थे लेकिन तुम पहले से भी चालाक हो गये हो। मैं इतने प्रयत्नों के बावजूद भी अपने दरबार से भ्रष्टाचार नहीं हटा सका, लेकिन तुम्हारी छोटी-सी चालाकी से लालची दरबारियों को सबक मिल गया। इसलिए आज से मैं तुम्हें “बीरबल” के नाम से पुकारूंगा और तुम दरबार में मेरे साथ बैठोगे और हर बात में मुझे सलाह दोगे।”

Moral of the Story शिक्षा:  नीतिशास्त्र ही प्रभावी प्रबंधन का आधार है। इसका स्थान कोई नहीं ले सकता। अपने द्वारा बनाई गई नीतियों का स्तर बनाकर रखना चाहिए ताकि सार्वभौमिक स्वीकृति मिलती रहे।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #27
अकबर का सपना


“एक बार बादशाह अकबर को सपना आया की उनके एक दाँत को छोड़ कर सभी दाँत टूट गये। अगली सुबह उन्होने राज्ये के सभी ज्योतिषियों को सपने का अर्थ जानने के लिए सभा मे बुलाया।

एक लंबे विचार विमर्श के बाद ज्योतिषियों ने बताया कि बादशाह के सभी रिश्तेदार उनसे पहले मर जाएंगे। इस बात को सुनकर अकबर बहुत परेशान हुए और उन्होने बिना किसी इनाम के वापिस भेज दिया। थोड़ी देर बाद, बीरबल सभा मे आए तो अकबर ने उनहे अपना सपना सुनाया और उसका अर्थ बताने को कहा।

बीरबल ने काफी सोच विचार के बाद बादशाह अकबर को जवाब दिया कि बादशाह अकबर अपने रिशतेदारों से बेहतर जीवन जीएंगे।

अकबर इस उत्तर से खुश हुए और बीरबल को इनाम दिया।

Hindi Story Moral शिक्षा: इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि सच को कहने के एक से अधिक तरीके हो सकते हैं। भविष्य मे आने वाली कठिनाइयों को किसी को परेशान किए बिना भी बताया जा सकता है। अगर यह जरूरी है कि आपको किसी को कोई कड़वी बात बाटनी है तो आप उसे इस ढंग से कहें कि उसकी कटुता कम लगे।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #28
लेन देन प्रक्रिया


“एक बार अकबर ने दरबारियों से पूछा, “मैंने देखा है कि जब आप किसी को कुछ देते हैं तो, देने वाले का हाथ, लेने वाले के हाथ से ऊपर होता है। क्या आप ऐसी कोई घटना जानते हैं कि उसमे उल्टा होता है?”

सभी ने नहीं कहा, “नहीं, ऐसा कोई तरीका नहीं है।“

लेकिन बीरबल असहमत थे।

बीरबल बोले, “जब आप किसी को तंबाकू देते हैं तो लेने वाला देने वाले कि खुली हथेली में ऊपर से उठता है।“

सभी ने बीरबल का जवाब सुनकर तुरंत ताली बजानी शुरू कर दी एवं राजा अकबर ने भी बीरबल की तारीफ़ की
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #29
अकबर बीरबल और एक चोर का किस्सा

“एक दिन अकबर और बीरबल सूर्य उदय देख रहे थे तभी पास मे ही कहीं शोर सुनाई पड़ा। वे वहाँ पहुँचे और देखा कि कुछ यात्रियों को लूट कर डाकू वहाँ से भाग गये।

बादशाह ने सैनिकों को डाकुयों के पीछे भेजा, लकिन कुछ हाथ नहीं लगा। वे बिना कोई सबूत छोड़े भाग चुके थे।

अकबर बीरबल से बोले, “मेरे बादशाह होने का क्या फायदा यदि मेरी नाक के नीचे भी लोगो को लूट लिया जाता है?”

बीरबल ने उत्तर दिया, “जहाँपनाह एक बड़ा चिराग जो कई मीलों तक रोशनी देता है उसके अपने नीचे अंधेरा होता है।”

अकबर यह बात सुनकर शांत हुए।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #30
सही और गलत का अन्तर


“एक दिन बादशाह अकबर ने सोचा, हम रोज़ रोज़ न्याय करते हैं। उसके लिय हमे सही और गलत का पता लगाना पड़ता है। लकिन सही और गलत के बीच आखिर अंतर क्या होता है?

दूसरे दिन बादशाह अकबर ने दरबारियों से पूछा। दरबारी इस प्रश्न का क्या जवाब देते। वे एक दूसरे कि शक्ल देखने लगे। बादशाह समझ गए कि किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं है। इसलिय उन्होने बीरबल से पूछा “तुम्ही बताओ, सही और गलत मे कितना अंतर है?”

बीरबल तपाक से बोले- “चार उंगल का, जहाँपनाह।”

बादशाह चौके। वह तो समझे थे कि इस सवाल का कोई जवाब नहीं हो सकता। इसलिए बीरबल का जवाब सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होने कहा, “बीरबल। खुलकर बताओ।”

“जहाँपनाह! आँख और कान के बीच चार उंगल का अंतर है। यही सही-गलत के बीच कि दूरी है। आप जिसे अपनी आँखों से देखते है, वह सही है। जिसे अपने कानो से सुनते हैं वह गलत भी हो सकता है। इसलिए सही और गलत के बीच चार उंगल का अंतर माना जायेगा।”

यह सुनकर बादशाह अकबर बोले- “वाह! बीरबल वाह! तुम्हारी बुद्धि और चतुराई का कोई जवाब नहीं।”

शिक्षा : सत्य जो कि अवलोकन और सुनी हुई बातों द्वारा प्राप्त होता है उसमे अंतर करना आवश्यक है। लकिन हम सोचते हैं कि जो भी देखा गया है वह सच है और विश्वसनीय है।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #31
भगवान एक हें


“अकबर बीरबल से बोले, “हम मुसलमानो के अल्लाह हैं, इसाइयों के यीशु, बौद्धों के बुद्ध। लेकिन तुम हिन्दू बहुत से भगवनों की पूजा करते हो। ऐसा क्यू?”

बीरबल : “ईश्वर तो एक है बस उसके नाम अलग अलग हैं।”

अकबर : “यह कैसे संभव है? ईश्वर इतने रूप कैसे ले सकता है और फिर भी एक है”।

बीरबल ने एक नौकर को बुलवाया जिसने पगड़ी पाहनी थी। उसने उसकी तरफ इशारा करते हुए  पूछा, “यह क्या है?”

नौकर : “एक पगड़ी।”

बीरबल : “इसे खोलो और अपनी कमर पर बांधो।”

जब उसने ऐसा किया तो बीरबल ने पूछा अब यह क्या है? नौकर ने कहा : “कमरबंध” | बीरबल: अब इसे खोलो और कमर से नीचे बांधो। अब यह क्या है? नौकर : “धोती”

अब बीरबल अकबर की तरफ मुड़े और बोले, “जब एक कपड़ा अलग अलग तरीके से प्रयोग किया जाता है तो उसका  नाम बदल जाता है। इसी तरह पानी जब आकाश मे होता है तो बादल कहलाता है, जब धरती पर गिरता है तो बारिश, जब बहता है तब नदी, जब जम जाता है तो बर्फ। इसी तरह ईश्वर एक है जिसे अनेक व्यक्तियों द्वारा अलग अलग नामों से बुलाया जाता है।

Story Moral शिक्षा : हम वस्तुओं को अपनी समझ के अनुसार नाम देते हैं। हमे इस बात का ध्यान रखना है की हमने वस्तु को जो नाम दिया है वह जरूरी  नहीं है कि वस्तु वही हो। कई बार वस्तु के नये उपयोग ढूंढने के लिय हमें उसके नाम से अलग हटकर सोचना पड़ता है।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #32
भगवान का ज्ञान

“एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- “तुम्हारे धर्म ग्रन्थों में यह लिखा है कि हाथी कि गुहार सुनकर श्री कृष्णजी पैदल दौड़े थे। न तो उन्होने किसी सेवक को साथ लिया न ही किसी सवारी पर गये। इसकी वजह समझ मे नहीं आती। क्या उनके सेवक नहीं थे?”

बीरबल बोले- “इसका उत्तर आपको समय आने पर ही दिया जा सकेगा जहाँपनाह।”

कुछ दिन बीतने पर एक दिन बीरबल ने एक नौकर को जो शहज़ादे को इधर-उधर टहलाता था, एक मोम कि बनी मूर्ति दी जिसकी शक्ल बादशाह के पोते से मिलती थी।

मूर्ति अच्छी तरह गहने-कपड़ों से सुसज्जित होने के कारण दूर से देखने मे बिल्कुल शहज़ादा मालूम होती थी। बीरबल ने नौकर को अच्छी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना है।

“जिस तरह तुम रोज़ बादशाह के पोते को लेकर उनके सम्मुख जाते हो, ठीक उसी तरह आज मूर्ति को लेकर जाना और बाग मे जलाशय के पास फिसल जाने का बहाना कर गिर पड़ना। तुम सावधानी से ज़मीन पर गिरना, लकीन मूर्ति पानी मे अवश्य गिरनी चाहिए। यदि तुम्हें इस कार्य में सफलता मिली तो तुम्हें इनाम दिया जायेगा।”

एक दिन बादशाह बाग में बैठे थे। वहीं एक जलाशय था।

नौकर शहज़ादे को खिला रहा था कि अचानक उसका पाँव फिसला और उसके हाथ से शहज़ादा छूटकर पानी में जा गिरा। बादशाह यह देखकर बुरी तरह घबरा गये और उठकर जलाशय की तरफ लपके।

कुछ देर बाद मोम की मूर्ति को लिए पानी से बाहर निकले।

बीरबल भी उसस वक़्त वहाँ थे वे बोले- “जहांपनाह, आपके पास सेवकों और कनीज़ों की फौज है, फिर आप स्वयं और वह भी नंगे पांव अपने पोते के लिय क्यू दौड़ पड़े? आखिर सेवक सेविकाएं किस काम आयेंगे?”

बादशाह बीरबल का चेहरा देखने लगे। वे समझ नहीं पा रहे थे कि बीरबल क्या कहना चाहते हैं? बीरबल ने कुछ देर रुककर फिर कहा- “अब भी आपकी आंखे नहीं खुलीं तो सुनिए-जैसे आपको अपना पोता प्यारा है उसी तरह श्रीकृष्णजी को अपने भक्त प्यारे हैं। इसलिए उनकी पुकार पर वे दौड़े चले गये थे।”
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #33
बीरबल की बुद्धी


“अकबर ने एक बार बीरबल से पूछा, “उसने इतनी बुद्धि कहाँ से प्राप्त की है?”

बीरबल बोले : “मूर्खों से। मैं उनके कार्य को देखता हूँ और उनकी गलतियों को न दोहरने की कोशिश करता हूं। इस प्रकार, मैं समझदार और समझदार हो गया। हमारे आसपास काफी मूर्ख हैं जिनसे हमें बुद्धि मिल सकती है”।

Hindi Story with Moral शिक्षा : दूसरों की गलतियों और अनुभवों से सीखना काफी सस्ता और कामियाब तरीका है जबकि अपनी ही गलतियों को दोहराना महंगा पड़ सकता है।
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Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #34

बिल्बल की खिचड़ी – Akbar Birbal best stories in Hindi with moral of  Birbal’s khichdi

एक बार सर्दी के दिन थे, अकबर और बीरबल एक झील के उस पार से गुजर रहे थे। अकबर रुक गया और अपनी उंगली को ठंडे पानी में डाल दिया और तुरंत यह कहते हुए बाहर निकाल दिया, “मुझे नहीं लगता कि इस ठंडे पानी में कोई भी एक रात को बनाए रख सकता है”। बीरबल ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और कहा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को खोजेगा जो ऐसा कर सकता है। अकबर ने 1000 सोने के सिक्कों का वादा किया, जो कोई भी झील के ठंडे पानी में एक रात बिता सकता है। जल्द ही, बीरबल को एक गरीब आदमी मिला जो 1000 सोने के सिक्कों के लिए चुनौती देने को तैयार था। दो शाही रक्षकों द्वारा पहरा दिया गया, गरीब आदमी पूरी रात ठंड के पानी में खड़ा रहा। सुबह इनाम के लिए गरीब आदमी को अदालत ले जाया गया। राजा द्वारा यह पूछे जाने पर कि वह बर्फ़ीले पानी में कैसे खड़ा हो सकता है, आदमी ने जवाब दिया, “मेरे प्रभु, मैं एक दीपक को देख रहा था जो थोड़ी दूरी पर जल रहा था, और मेरी पूरी रात उसे देखती रही”। यह जानने पर, सम्राट ने कहा, “यह आदमी इनाम के योग्य नहीं है क्योंकि वह झील में खड़े होने का प्रबंधन कर सकता था क्योंकि वह दीपक से गर्म हो रहा था”। उस गरीब व्यक्ति को निराशा और दिल टूटा हुआ महसूस हुआ और वह मदद के लिए बीरबल के पास पहुंचा। बीरबल अगले दिन अदालत में नहीं गए। अकबर ने इसका कारण जानने के लिए बीरबल का दौरा किया। अपने मनोरंजन के लिए, राजा ने बीरबल को लगभग 6 फीट ऊपर एक बर्तन के साथ आग के पास बैठा पाया। पूछताछ करने पर, बीरबल ने कहा, “मैं खिचड़ी पका रहा हूँ, मेरे प्रभु”। अकबर हँसने लगा और कहा कि असंभव था। बीरबल ने कहा, “यह संभव है मेरे राजा- अगर कोई गरीब आदमी सिर्फ दूर पर जलते हुए दीपक को देखकर गर्म रह सकता है, तो मैं इस खिचड़ी को उसी तरह से पका सकता हूं।” अकबर ने बीरबल की बात को समझा, और गरीब आदमी को इस चुनौती के लिए इनाम दिया।

Moral of Hindi story:-
आशा लोगों को कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #35
राज्य में कौआ:-Akbar Birbal crow in kingdom stories in Hindi with moral

एक बार ठीक धूप के दिन, राजा अकबर और बीरबल महल के बगीचों में इत्मीनान से टहल रहे थे। अचानक, राजा अकबर ने एक ट्रिकी प्रश्न पूछकर बीरबल की बुद्धिमत्ता का परीक्षण करने की सोची। बादशाह ने बीरबल से पूछा, “हमारे राज्य में कुल कितने कौवे हैं?” बीरबल राजा की आवाज़ में मनोरंजन कर सकते थे, और कुछ ही मिनटों में बीरबल ने जवाब दिया, “मेरे राजा, हमारे यहाँ अस्सी हज़ार नौ सौ इकहत्तर कौवे हैं।” राज्य “। आश्चर्यचकित और आश्चर्यचकित, अकबर ने बीरबल को आगे परीक्षण किया, “क्या होगा अगर हमारे पास इससे अधिक कौवे हैं?” ज्यादा विचार किए बिना, बीरबल ने जवाब दिया, “ओह, तो अन्य राज्यों के कौवे हमें दौरा कर रहे होंगे ”। “क्या होगा अगर कम कौवे हैं, अकबर से पूछा?” “ठीक है, तो हमारे कुछ कौवे अन्य राज्यों का दौरा कर रहे होंगे”, बीरबल ने उसके चेहरे पर मुस्कराहट के साथ उत्तर दिया। अकबर ने बीरबल की हंसी और मजाक की भावना को देखकर मुस्कुरा दिया।

Moral of Hindi story:-
यदि कोई आसानी से सोचता है तो हमेशा एक समाधान होता है।


Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #36
मूर्ख चोर:-Akbar Birbal Hindi story with moral of a foolish thief

एक बार राजा अकबर के राज्य में एक अमीर व्यापारी को लूट लिया गया। दुखी व्यापारी ने अदालत में जाकर मदद मांगी। अकबर ने बीरबल से व्यापारी को डाकू को खोजने में मदद करने के लिए कहा। व्यापारी ने बीरबल को बताया कि उसे अपने एक नौकर पर शक था। व्यापारी से संकेत मिलने पर, बीरबल ने सभी नौकरों को बुलाया और उन्हें एक सीधी रेखा में खड़े होने के लिए कहा। जब डकैती के बारे में पूछा गया, तो सभी ने उम्मीद के मुताबिक इसे करने से इनकार कर दिया। बीरबल ने फिर उसी लंबाई की एक छड़ी, उनमें से प्रत्येक को सौंप दी। विचलित करते हुए, बीरबल ने कहा, “कल तक, डाकू की छड़ी दो इंच बढ़ जाएगी”। अगले दिन जब बीरबल ने सभी को बुलाया और उनके डंडे का निरीक्षण किया, तो एक नौकर की छड़ी दो इंच कम थी। असली चोर को खोजने के रहस्य के बारे में व्यापारी द्वारा पूछे जाने पर, बीरबल ने कहा, “यह सरल था: चोर ने अपनी छड़ी को दो इंच काट दिया था, यह डर था कि यह आकार में बढ़ जाएगा”।


Moral of Hindi story:-
सत्य की हमेशा जीत होती है।


Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #37
मुर्गा और मुर्गी की कहानी:-Akbar Birbal best Hindi story with moral of a hen and a roaster 

एक बार राजा अकबर ने अपने पसंदीदा मंत्री बीरबल पर एक चाल चलने की सोची। उन्होंने अन्य सभी मंत्रियों के साथ बातचीत की और उनके साथ अपनी योजना साझा की। इस योजना के अनुसार, सभी मंत्रियों को अगले दिन एक-एक अंडा देना था, जो उनके वस्त्र के अंदर छिपा हुआ था। अगले दिन, अकबर ने अपने दरबारियों से कहा कि उसका एक सपना है – इसके अनुसार, यदि मंत्री शाही तालाब से एक अंडा लेते हैं, तो यह राजा के प्रति उनकी वफादारी साबित करेगा। अपने सपने को बयान करने के बाद, अकबर ने अपने सभी मंत्रियों को ऐसा ही करने और अपनी वफादारी दिखाने के लिए कहा। जैसा कि योजना बनाई गई थी, सभी मंत्रियों ने अंडों की तलाश करने का नाटक किया, और कुछ ही समय में उन सभी ने एक-एक अंडा वापस कर दिया जो पहले से ही उनके रोब के अंदर छिपा हुआ था। बीरबल अंडे की तलाश में रहा, लेकिन उसे कोई नहीं मिला। जब बीरबल खाली हाथ पहुँचे, तो सभी ने उनकी प्रशंसा की, और वे एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। बीरबल पूरे परिदृश्य का अनुमान लगा सकते थे और बादशाह के पास गए और जोर से दहाड़ते हुए आवाज लगाई। राजा द्वारा यह पूछे जाने पर कि उसने ऐसा क्यों किया, बीरबल ने उत्तर दिया, “मेरे राजा, मैं मुर्गी नहीं हूँ, और इसलिए, मैं तुम्हें कोई अंडे नहीं दे सकता, लेकिन मैं एक मुर्गा हूँ, और यही मैं सबसे अच्छा कर सकता हूँ”। यह सुनकर हर कोई दिल खोलकर हँसा।

Moral of Hindi story:-
आत्मविश्वास कठिन परिस्थितियों से निपटने में मदद करता है।


Akbar Birbal Stories in Hindi with moral #38
बुद्धि का बर्तन:-Akbar Birbal best Hindi story with moral of a wisdom pot

एक बार की बात है, बादशाह अकबर बीरबल पर इस कदर पागल हुए कि उन्होंने बीरबल से कहा कि वे राज्य छोड़ कर चले जाएं। हार्टब्रोकन, बीरबल ने राज्य छोड़ दिया और पास के एक गाँव में एक किसान के घर में शरण ली। बीरबल ने अपने दिन खेत में काम करने में बिताए। समय बीतने के साथ, राजा अकबर ने अपने पसंदीदा दरबारी को याद करना शुरू कर दिया। एक दिन, अकबर ने बीरबल को खोजने के लिए अपने शाही गार्डों को भेजने का फैसला किया। पहरेदारों ने सभी दिशाओं में बीरबल की तलाश की, लेकिन उनका सारा प्रयास बेकार चला गया। अकबर ने बीरबल को खोजने के लिए एक तरकीब सोची – उसने एक घोषणा की कि जो कोई भी उसे बुद्धिमत्ता से भरा हुआ बर्तन देगा उसे हीरे से भरा बर्तन दिया जाएगा। यह खबर आस-पास के सभी गाँवों और बीरबल तक भी पहुँची। राजा के रहस्य को कैसे सुलझाया जाए, यह तय करने के लिए ग्रामीणों ने एक बैठक की। बीरबल ने यह कहते हुए मदद करने की पेशकश की कि उन्हें एक महीने का समय चाहिए। बीरबल ने एक बर्तन लिया और उसमें एक छोटा-सा तरबूज डाला जो कि उसकी बेलों को काटे बिना नहीं था। एक महीने के बाद, तरबूज बर्तन के आकार तक बढ़ गया। यह बर्तन राजा को भेजा गया था, और उसे बताया गया था कि बर्तन को बिना तोड़े ही उसे हटाया जा सकता है। अकबर जानता था कि यह कोई और नहीं बल्कि बीरबल हो सकता है। अकबर बीरबल को अपने दरबार में वापस लेने आया।


Moral of Hindi story:-
जल्दबाजी बेकार कर देती है, कठिन सोचें क्योंकि हर समस्या का समाधान है।

 

 

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